अटल टनल

अटल टनल

सारांश : अटल टनल, दुनिया की सबसे लम्बी टनल भारत देश में बन के तैयार है जो किसी अजूबे से कम नहीं है| इस टनल में वो सारी खुबिया है जो आज और आने वाले समय के लिए जरुरी है | जानते है क्या क्या खास बाते इस टनल की |

अटल टनल की पृष्ठ भूमि

रोहतांग दर्रे के नीचे रणनीतिक महत्त्व की सुरंग बनाये जाने का फैसला 03 जून 2000 को लिया गया था | यह पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी के कार्यकाल के दौरान तय हुआ था | अटल सुरंग के दक्षिण भाग को जोड़ने वाली सड़क की आधारशिला 26 मई 2002 को रखी गयी थी | अटल बिहारी वाजपयी ने साल 2003 में रोहतांग टनल का शिलान्यास किया था | अटल सुरंग के दोनों छोर पर सड़क निर्माण 15 अक्टूबर 2017 को पूरा हुआ | हिमाचल प्रदेश सरकार के मंत्रिमंडल की बैठक में 20 अगस्त 2018 को रोहतांग टनल का नाम पूर्व प्रधानमंत्री के नाम पर रखने का प्रस्ताव किया गया |

अटल टनल अटल बिहारी वाजपयी को सच्ची श्रधांजलि

अटल बिहारी वाजपयी

केन्द्र सरकार द्वारा हिमाचल और लेह को जोड़ने वाले रोहतांग दर्रे पर बनाये जा रहे टनल का नाम अटल टनल रखा गया | अटल टनल लेह और मनाली को जोडती है |प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी की 95 वी जयंती पर 25 दिसम्बर 2019 को, उनकी स्मृति में रोहतांग टनल का नामकरण अटल टनल के रूप में किया | मनाली को लेह से जोड़ने वाली रोहतांग सुरंग अब अटल टनल के नाम से जानी जायगी जो की पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपयी के लिए एक सच्ची श्रधांजलि होगी |

दुनिया की सबसे लम्बी रोड टनल

10 हजार फीट पर स्थित दुनिया की सबसे लम्बी रोड टनल देश में बनकर तैयार हो गयी है | इसे बनने में दस साल लग गये लेकिन, अब इससे लद्धाख साल भर पूरी तरह से जुडा रहेगा| साथ ही साथ इसकी वजह से मनाली से लेह के बीच करीब 46 कि.मी की दूरी कम हो गयी है | 10,171 फीट की ऊंचाई पर बनी इस टनल को रोहतांग पास से जोड़कर बनाया गया है यह दुनिया की सबसे सबसे लम्बी रोड टनल है | यह करीब 8.8 कि.मी लम्बी है और 10मी चोडी है |

यातायात में आसानी होगी, अब मनाली से लेह जाने में 46 की.मी की दूरी इस टनल के बनने से कम हो गयी है | यह टनल सिर्फ मनाली को लेह से नहीं जोड़गी बल्कि हिमाचल प्रदेश को लाहोल स्पति से भी जोड़ेगी और यातायात को आसन कर देगी | यही कुल्लू जिले के मनाली से लाहोल स्पति जिले को भी जोड़ेगी | इसके बनने से सबसे ज्यादा फायदा लद्धाख में तैनात भारतीय सेनिको को मिलेगा | इस टनल के अन्दर कोई भी वाहन अधिकतम 80 की .मी . प्रतिघंटा की रफ़्तार से चल सकेगा | यह टनल इस तरीके से बनाई गयी है कि इसके अन्दर एक बार में 3000 कार या 1500 ट्रक एक साथ निकाले जा सकते है |

घोड़े की नाल के आकार की सुरंग

घोड़े की नल के आकार में टनल

इस टनल की बनाने की शुरुआत 28 जून 2010 को हुई थी | इसे बोर्डेर रोड आर्गेनाईजेशन (BRO) ने बनाया है, यह सुरंग घोड़े के नाल के आकार में बनाई गयी है | इसे बनाने में BRO के इंजिनियरो और कर्मचारियों को काफी मशक्कत करनी पड़ी | यहाँ पर तापमान माइनस 30 डिग्री तक चला जाता था | इस टनल को बनाने के दौरान 8 लाख कयुबिक मीटर पत्थर और मिटटी निकाली गयी.

इस टनल के अन्दर अत्याधुनिक ऑस्ट्रेलियन टनलिंग मेथड का उपयोग किया गया है| वेंटिलेशन सिस्टम भी ऑस्ट्रेलियाई तकनीक पर आधारित है | इस टनल की डिजाईन बनाने में DRDO ने भी मदद की है ताकि बर्फ और हिमस्खलन से इस पर कोई असर न पड़े, यातायात में किसी भी मौसम में किसी भी प्रकार की कोई बाँधा इस टनल पर न आ सके | इस टनल के अन्दर निश्चित दूरी पर CCTV कैमरे लगे होंगे जो स्पीड और हादसों पर नियंत्रण रखने में मदद करेंगे | टनल के अंदर हर 200 मीटर की दूरी पर एक फायर हैइड्रेट की व्यवस्था की गयी है ताकि आग लगने की स्थति में नियन्त्रण पाया जा सके | पंजाब यूनिवर्सिटी और टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ़ फंडामेंटल रिसर्च ने इस टनल में वैज्ञानिक प्रयोग करने के लिए न्यूट्रिनो डीजेक्टर लगाने की सरकार से मांग की है|

अटल टनल की विशेषताए

अटल टनल रोहतांग

एस्केप सुरंग : इसमें एक आपातकालीन एस्केप सुरंग भी शामिल है , जिसे मुख्य सुरंग के नीचे बनाया गया है | यह आपातकालीन निकास प्रदान करेगा , जो मुख्य सुरंग को अनुपयोगी बना सकता है |ऑल वेदर कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए मनाली से टनल तक पहुचे मार्ग पर स्नो गेलारिया भी बनाई गयी है |

कनेक्टिविटी और सुरक्षा : हर 150 मीटर पर 4जी फ़ोन की सुविधा, 500 मीटर पर आपातकालीन निकास के रूप में सुरंग , हर 2.2 की.मी पर हवा की गुणवत्ता का ध्यान रखा गया है, हर 60 मीटर पर CCTV ऑपरेट किए गए हैं, कैमरो के साथ प्रसारण और घटना का पता लगाने वाली स्वचालित प्रणाली लगाई गयी है| सुरंग के दोनों छोरो पर कंट्रोल रूम का निर्माण किया गया है ताकि टनल पर पैनी निगरानी रखी जा सकें |

समय की बचत : हिमालय की पीर पंजाल पर्वत श्रेणी में बनी यह सुरंग रोहतांग दर्रे तक पहुचने के लिए वैकल्पिक मार्ग भी होगी जो 13 हजार 50 फीट की ऊंचाई पर स्थित है | मनाली घाटी से लाहोल स्पीति घाटी की यात्रा में आमतोर पर पाच घंटे से आधिक समय लगता है जो अब 10 मिनट से कम समय में पूरा हो जायगा | यह 10.5 मीटर चोडी दो लेन वाली सुरंग है | इस सुरंग का निर्माण हिमाचल प्रदेश और लद्धाख के सुरंग सीमावर्ती क्षेत्रो में रहने वाले लोगो को सदेव कनेक्टिविटी उपलब्ध करने की दिशा में एक महत्त्वपूर्ण कदम है | सेरी नुल्लाह डिफाल्ट जोन इस सुरंग के अंदर है |

भारत की सामरिक शक्ति में इजाफा : इस सुरंग के उद्धघाटन के बाद पाकिस्तान चीन बोर्डर पर भारत की रणनीतिक ताकत बढ जायगी| साथ ही अग्रिम चौकियो की मुस्तेदी से चौकसी हो सकगी | इसके बनने से सबसे ज्यादा फायदा लद्धाख में तेनात भारतीय फोजियो को मिलगा | इसके चलते सर्दियों में भी हथियार और रसद की आपूर्ति आसानी से हो सकगी |

अटल टनल का उद्घाटन

मोदी करंगे उद्घाटन

प्रधानमंत्री नरेद्र मोदी 3 अक्टूबर 2020 को रोहतांग में बनी दुनिया की सबसे लम्बी अटल टनल का उद्घाटन करेंगे जिसके लिए वो पहले मनाली पहुचेंगे | बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनोत भी इस उदघाटन समारोह में शामिल हो सकती है |

उद्घाटन में शामिल कंगना |

अटल टनल के निर्माण पर करीब 4000 करोड़ रुपये खर्च होंगे | शुरुआती चरण में सुरंग की निर्माण की लागत लगभग 1400 करोड़ रुपये आंकी गयी थी | अटल टनल के ठीक ऊपर स्थित सेरी नदी के पानी के रिसाव के कारण अटल सुरंग के निर्माण में लगभग 5 साल की देरी हुई |

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