मंदिर निर्माण कार्य – राम मंदिर

राम मंदिर निर्माण का नया मॉडल

राम मंदिर निर्माण का मॉडल

राम मंदिर के लिए  नए मॉडल का निर्माण किया गया है| सी बी सोमपुरा द्वारा यह मॉडल तैयार किया गया | पहले जो  मॉडल बनाया गया  था उसी मॉडल को नया आकार दिया गया है |

पहले मॉडल में मंदिर आयताकार था अब कुर्सी फॉर्म में होगा | पहला मॉडल बी एच पि ने निर्माण किया था उसी मॉडल का विस्तार किया गया है | बी एच पी के मॉडल में गर्भ गृह के ऊपर शिखर की उचाई 138 मीटर थी, जो अब 161 फिट उची कर दी गयी है |

जो दो मंडल सामने थे गर्भगृह के बाहर अब वो गर्भ गृह के दाये और बाये बनाये जायगे | मंडलों की गिनती को बढ़ाया गया है | फ्रंट साइड पर एक और छोटा मंडल बनाया जायेगा | यानि कुल मिला कर 5 मंडलों का निर्माण किया जायेगा |

पत्थरो का काम विश्व हिन्दू परिषद् के जो पत्थर है उन्ही पत्थरों से होगा | राजस्थान से गुलाबी पत्थर मंगाए गये है| उनहें ही गाड़ने का , तराशने का काम कार्यशाला में होगा | पहले से ज्यादा भव्य और विशाल मंदिर का निर्माण करवाया जाएगा |

पहले मंदिर का आकर 313 /349 फीट था, जो अब बड़ा कर 344/235 फीट कर दिया गया है | पत्थरो की मात्रा 2 लाख 33 हजार घन आकी गयी थी | अब बड़ा कर 3 लाख 85 हजार घन फीट कर दी गयी है |

राम मंदिर मॉडल में बदलाव क्यों?

सुप्रीम कोर्ट की जजमेंट के बाद साधु संतो की मीटिंग हुई | मीटिंग में यह मांग रखी गई की राम मंदिर भव्य से भव्य बने | मंदिर इतना भव्य और बड़ा बनाया जाए की देश का सबसे बड़ा मंदिर कहलाए |

इसी तहत एल .एंड. टी कंपनी को निर्माण कार्य सौपा गया | कंपनी ने ज़मीन के अंदर खुदाई करके पहले मिटटी की टेस्टिंग करवाई | टेस्टिंग करके यह पता चला की ज़मीन में सेस्मिक जोन  होने की वजह से कितनी क्षमता है | ज़मीन कितना भार सह सकती है इसके आधार पर नया मॉडल तैयार किया गया | ज़मीन की क्षमता के मुताबित इसको 161 फीट पर सिमित किया गया | मंदिर का फ्रंट पहले 140 फिट था जो अब 144 फिट होगा |

RAM MANDIR MODEL

मंदिर में 3 मंडल और बनाये जायगे | पहले दो मंडल हुआ करते थे नृत्य मंडल और रंग मंडल | लेकिन अब मंडलों की संख्या 5 कर दी गयी है ताकि लोगो की आने की क्षमता बढ़ाई जा सके | ओवर ऑल मंदिर का क्षेत्र फल 52 हजार स्क्वायर फीट का होगा |

मंदिर के मॉडल में बदलाव इसलिए किया गया ताकि मंदिर भव्य विशाल दिव्य से दिव्य दिखाई दे |

राम मंदिर निर्माण बजट

केन्द्र सरकार ने अयोध्या में विशाल और भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए 15 से 20 स्वतंत्र ट्रस्ट का गठन किया | प्रधानमंत्री ने सुप्रीम कोर्ट की 3 महीने की समय सीमा ख़त्म होने के चार दिन पहले लोक सभा में इसकी घोषणा की | इसके बाद ट्रस्ट को केन्द्र की और से एक रुपये का नकद दान मिला, ताकि ट्रस्ट अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का कार्य शुरू कर सके | यह दान ट्रस्ट को गृह मंत्रालय के सचिव डीमर ने दिया |

ट्रस्ट अंचल संम्पति समेत बिना किसी शर्त के किसी भी व्यक्ति से किसी भी रूप में दान, अनदान, योगदान ले सकती है | अयोध्या में भव्य मंदिर के निर्माण के लिए अलग – अलग संस्थाओ से करोड़ों का दान मिला है | योगी आदित्य नाथ ने मुख्य मंत्री बनने से पहले कई घोषणाए की | योगी आदित्य नाथ ने अपने पिछले बजट में अयोध्या के विकास के लिए 447 करोड़ रुपये का बजट मंजूर किया था |

राम मंदिर का निर्माण कार्य शुरू

मंदिर के निर्माण स्थल पर 30 से 40 फिट मलबा हटा दिया गया है | 17 से 60 फीट नीचे की मिटटी का परिक्षण किया गया | उसके बाद नीव के नक़्शे को अंतिम रूप दिया गया | पूर्व दिशा में मंदिर के ढाचे का वजन कुछ कम होगा और 40 फीट की गहराई के नमूने लिए जायगे | ये सभी काम एल. एंड. टी कंपनी को दिया गया है | इटो का कार्य सोमपुरा मार्बल्स करेगी | मंदिर परिषद में एक संग्रहालय भी बनाया जायगा जिसमे राम जन्म भूमि से निकले अवशेषों को रखा जायगा | मंदिर बनने के बाद इनमे कई नए संग्रहालयो को जगह दी जायगी |

श्री राम भगवान् की प्रतिमा

राम भगवान् की प्रतिमा

447 करोड़ रुपये का इस्तेमाल मीरा पुर इलाके में 61 .3/8 हेक्टेयर ज़मीन खरीदने में किया जाना है | सरयु किनारे की ज़मीन पर भगवान श्री राम की 221 मीटर की कास्य की प्रतिमा बनाई जायगी | इस प्रतिमा के लिए 800 करोड़ का बजट अलग से तैयार किया गया| सरयु के तट पर लगने वाली भगवान् राम की प्रतिमा विश्व की सबसे उची प्रतिमा होगी |भगवान् राम की मूर्ति 161 मीटर उची होगी और मूर्ति के ऊपर 20 मीटर ऊचा छत्र एवं नीचे कुल 50 मीटर का आधार होगा |

50 मीटर ऊचे आधार के अंदर भी भव्य एवं आध्यत्मिक संग्रहालय का प्रावधान होगा | संग्रहालय में अयोध्या का इतिहास, एशाक्वाक वंश के इतिहास  में राजा मन से लेकर वर्तमान श्री राम जन्म भूमि तक का इतिहास , भगवान विष्णु के समस्त अवतारों के विवरण सहित भारत में समस्त सनातन धर्म के विषय में जानकारी व् प्रदर्शन की व्यवस्था होगी |

श्री राम मूर्ति का निर्माण कार्य

सबसे उची राम भगवान की मूर्ति

भगवान श्री राम की मूर्ति भव्य और विशाल बनेगी जो स्टेचू ऑफ़ यूनिटी से भी ऊची होगी | मूर्ति बनाने का कार्य प्रसिद्ध मूर्तिकार रामसुतार को दिया गया है . जिन्होंने स्टेचू ऑफ़ यूनिटी मूर्ति का निर्माण किया था | इस मूर्ति का निर्माण लखनऊ और अयोध्या को जोड़ने वाले बाड के पास होगा | भगवन श्री राम की मूर्ति का निर्माण कार्य 2021 से 2022 तक पूरा होगा |

राम मंदिर निर्माण के लिए तारीख का चुनाव

9 नवम्बर 2019 को सुप्रीम कोर्ट ने अयोध्या के हक में फैसला सुनाया| इसके बाद केन्द्र सरकार के कहने पर एक ट्रस्ट का निर्माण किया गया | ट्रस्ट लगातार बैठक कर रही थी, तभी भूमि पूजन के लिए 5 अगस्त की तारीख तय की गई | 18 जुलाई को इस तारीख का फैसला लिया गया | ट्रस्ट के अध्यक्ष नृत्य गोपाल दास  प्रवक्ता और महंत कमल ने ग्रह नक्षत्रो को ध्यान  में रखते हुए, प्रधानमंत्री को 3 और 5 अगस्त की तारीख का सुझाव भेजा था | इसके बाद भूमि पूजन की तारीख 5 अगस्त तय की गई थी|

शुरू के वक्त में ट्रस्ट काम आरम्भ करना चाहती थी | लेकिन कोरोना संक्रमण के कारण टाल दिया गया | 3 अगस्त से कार्य शुरू हुआ और 5 को भूमि पूजन के साथ समाप्त हुआ | महंत गोपाल दास ने बताया की भूमि पूजन के लिए छोटी छावनी से 40 किलो की चाँदी से बनी ईट नीव के लिए भेट की गयी है |

5 अगस्त का राजनीतिक महत्त्व

5 अगस्त को भूमि पूजन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथो से हुआ इस तारीख का एक राजनीतिक महत्त्व भी है | इस तारीख को मोदी जी की सरकार ने दूसरे कार्यकाल के पहले वर्ष में संविधान के अनुछेद 370 को निष्प्रभावी किया था | यानि कानून बना कर इसकी रुपरेखा में बदलाव किया था | एक साल इस कार्य को भी पूरा होने जा रहा है |भूमि पूजन इसके ठीक एक वर्ष बाद करना भाजपा सरकार के लिए प्रतीकात्मक महत्त्व रखता है | अनुछेद 370 को हटाना और अयोध्या में राम मंदिर बनाना 80 के दशक से ही यानि अपने जन्म के समय के बाद से ही भाजपा के लिए एक मुख्य चुनोती रहा है|

निष्कर्ष :- लम्बे समय के संघर्ष के अंतराल के बाद , अब जाकर भगवान् राम और उनके भक्तो को न्याय मिला | सुप्रीम कोर्ट के अंतिम फैसले के रूप में राम मंदिर निर्माण को मंजूरी मिली | राम मंदिर को देश का सबसे बड़ा और भव्य  मंदिर बनाया जाएगा |

अयोध्या राम मंदिर इतिहास

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राम मंदिर मॉडल

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