राफ़ेल एक लड़ाकू विमान

राफ़ेल लड़ाकू विमान

राफ़ेल नयी तकनीक से बना 4.5 जनरेशन का डबल इंजन लड़ाकू विमान है. जो की फ्रांस की कंपनी डसौल्ट एविएशन द्वारा निर्मित है. राफ़ेल ने अपनी पहली उड़ान 4 जुलाई 1986 में भरी. यह बहुत ही शक्तिशाली और विध्वंसक विमान है.

विमान के लिए फ्रांस के साथ भारत की  डील पर हस्ताक्षर 2016  में हुए, जब भाजपा सरकार सत्ता में थी. हलाकि वायु सेना द्वारा इसकी  मांग इससे पहले भी कई बार की जाती रही पर इसे लगातार अनसुना किय जाता रहा.

राफ़ेल की डील पर विचार कांग्रेस सरकार के समय से हि किया जाता रहा पर कभी डील को सुनिश्चित नहीं किया गया. कभी रक्षा बजट में कमी होने के कारण ये सौदा ना हो पाया तो कभी किसी और कारण, लेकिन सत्ता में आई नयी भाजपा सरकार ने इसमें ज़रा भी देर ना की और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए इसपे गहन विचार करते हुए फ्रांस से इस रक्षा सौदे को सुनिश्चित किया.

भारत का इस सौदे में 36 राफेल विमानों का इकरार 59,000 करोड़ में हुआ. जिसमे एक विमान की कीमत लगभग 1638 करोड़ तय की गई.

राफेल  का अकार 

राफ़ेल की लम्बाई 15.30 मीटर है. चौडाई विंड्सपैन के साथ 10.30 मीटर और इसकी ऊँचाई 5.30 मीटर है. सुखोई विमान से छोटा होने के कारण राफेल का इस्तेमाल करना आसान है. इसका यह आकार इसे आम विमानों से विध्वंसक बनाता है. यह विमान ऊँचे और पहाड़ी इलाको में बहुत विध्वंसक कारगर साबित हुए है क्योंकि इसका आकर इसे बाकी विमानों से अलग बनाता है. आम विमानों से इसका आकर छोटा है और इसकी  लड़ने की क्षमता ज्यादा. राफ़ेल अपने छोटे विंड्सपैन के कारण पहाड़ी इलाको में जरूरत अनुसार 180 डिग्री तक घूम सकता है.

राफ़ेल की  क्षमता

राफेल का वजन 24,500 किलोग्राम है और इसके हथियार या अतिरिक्त भार ले जाने की क्षमता 9,500 किलोग्राम है. इसके अतिरिक्त सर्वाधिक गति 2300 किलोमीटर प्रति घंटा है. हथियार ले जाने की क्षमता और इसकी गति इसे और विध्वंसक बनाती है. राफेल की एक बार की उड़ान क्षमता 3700 किलोमीटर है, 1 मिनट में 60,000 फीट तक की ऊँचाई प्राप्त कर सकता है. यह विमान 24 घटे में 5 बार उड़ान भर सकता है या कहें की मिशन पर जा सकता है. हर मौसम में उड़ान भर सकता है. 6 सुपरसोनिक मिसाइल से इसे लैस किया जा सकता है. 3 लेज़र गाइडेड बम इसमें  लगाए जा सकते है. परमाणु हथियार  भी इसमें लगाया जा सकता है जो इसकी सबसे बड़ी ताकत है.

47 हजार लीटर फ्यूल इसमें भरा जा सकता है और आवश्यकता अनुसार फ्यूल रिफलिंग के लिए इसे निचे एयरेबेस पर उतारने की जरूरत भी नहीं पड़ती, हवा में ही रहते इसमें फ्यूल भरा जा सकता है और विमान अपने साथ एक साथ चार मिसाइल लेकर उड़ान भर सकता हैं. राफ़ेल बहुत हि फुर्तीला और भरोसेमंद विमान हैं, कई मोर्चो पर एक साथ लड़ने की ताकत रखता हैं. 180 डिग्री तक जरूरत अनुसार यह विमान अपने आपको घुमा सकता हैं.

राफेल की क्षमता

राफ़ेल का अत्याधुनिक रडार और एवियोनिक सिस्टम

राफेल का रडार और एवियोनिक सिस्टम बहुत ही अत्याधुनिक है. इसमें AESA/RBE2 रडार लगा है जो 40 टारगेट को एक साथ ट्रैक कर सकता है और एक साथ 8 टारगेट्स पर हमला भी कर सकता है. यह दुश्मन देश के किसी भी जहाज के रडार और कोम्यूनीकेशन सेंटर को इंटरसेप्ट कर सकता है. यह मौसम की सटीक जानकारी दे सकता है ताकि वक्त रहते मिशन में बदलाव किये जा सके.

राफेल का इंजन

राफ़ेल में दो इंजन ऑपरेट किये गए है. जो की इसके एक इंजन के काम न करने पर, इसे दुर्घटना से बचने की क्षमता देता है. यह M88.4E इंजन से लैस है, जो इसे जीरो डिग्री टेम्परेचर पर भी उड़ान भरने के सक्षम बनाता है. सिया चीन या लद्दाक जैसे इलाको में -30 डिग्री टेम्परेचर रहता है जहां अक्सर विमान के इंजन को स्टार्ट करने में कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है. ऐसे इलाको में राफेल बहुत ही कारगर साबित होंगे.

राफ़ेल का एक्स गार्ड डिकॉय सिस्टम

यह सिस्टम राफेल को एक ऐसी क्षमता प्रदान करता है जिससे राफेल दुश्मन की मिसाइल को धोखा दे सकता है. अगर कोई भी मिसाइल राफ़ेल का पीछा करती है तो इसका डिकॉय सिस्टम एक्टिव हो जायगा और तब मिसाइल राफ़ेल से नहीं इस सिस्टम से जा टकराएगी.

राफ़ेल में लगा इजराईल का हेलमेट माउंटेड  सिस्टम

इजराइली तकनीक से लैस, राफ़ेल विमान में हेलमेट माउंटेड सिस्टम इनस्टॉल किया गया है. अगर कोई भी दुश्मन जहाज दाई या बाई तरफ से किसे भी दिशा से अपनी और आता नजर आता है. तो राफेल के पाईलेट के सिर्फ उस दिशा में देखने भर से सभी मिसाइल आदि हथियार उसी दिशा में लॉक हो जाते है. तब पाईलेट को मिसाइल लॉन्च  करने के लिए अलग से बटन दबाने की जरूरत भी नहीं पड़ती, जो राफेल को समय रहते हमला करने की शक्ति प्रदान करता है.

राफ़ेल का कॉम्बैट रेडियस

राफेल का कॉम्बैट रेडियस 3400 किलोमीटर है, दुश्मन की 3400 किलोमीटर सीमा के अंदर जा सफलतापूर्वक मिशन पूरा करके वापिस अपनी सीमा में आ सकता है. एकबार में 3400 किलोमीटर की उड़ान भर वापिस आ सकता है.

राफ़ेल का स्पेक्ट्रा वॉर फेयर सिस्टम

इस सिस्टम के जरिये राफेल, दुश्मन जहाज की मिसाइल के आगे अपने आपको अदृश्य बना सकता है. यह राफेल को दुश्मन के राडार से बचने की क्षमता देता है. राफेल के चारो तरफ यह सिस्टम एक्टिव रहता है. 360 डिग्री के एंगल में यह राफेल को दुश्मन के रडार से बचाने का काम करता है.

राफेल में लगी मिसाइल

राफेल में लगी मिसाइल 

राफ़ेल मे लगी मिसाइलो ने दुश्मन देश चीन और पाकिस्तान की नींद उड़ा रखी हैं उन्हें बैकफुट पर ला खड़ा कर दिया है. विमान में लगी शक्तिशाली मिसाइलें –

पहली मिसाइल – मिटयोर मिसाइल

मिटयोर मिसाइल एक गाइडेड मिसाइल है जो की आवाज से चार गुना तेज रफ़्तार से हमला कर सकती है. ये हवा से हवा में वार करने में सक्षम है. बिच रस्ते में इसकी दिशा बदली जा सकती है और इसका लक्ष्य भी बदला जा सकता है. इसकी  रेंज 150 किलोमीटर है . बालाकोट के समय विंग कमांडर अभिनन्दन ने मिग 21 बाईसन के जरिये पाकिस्तानी लड़ाकू विमान F16 जहाज का पीछा करके उसे तबाह कर दिया था. जिसमे विंग कमांडर पाकिस्तानी सीमा में पहुच गए थे, पर मिटियोर मिसाइल राफ़ेल को यह क्षमता देती है की इसके जरिए अपनी सीमा में रहते हुए भी हम अब पाकिस्तानी सीमा पार के लक्ष्य भी भेद सकते है.

दूसरी मिसाइल -सकल्प मिसाइ 

सकल्प मिसाइल के जरिये हवा से जमींन में वार किया जा सकता है. यह एक क्रूज मिसाइल है, जिसका वजन 1300 किलोग्राम और इसकी रेंज 300 किलोमीटर है. लॉन्च करने के बाद भी इसकी दिशा बदली जा सकती है. एयर बेस, राडार, कम्युनिकेशन सेंटर, बंकर, छावनिया सबको निशाना इसके जरिए बनाया जा सकता है.

तीसरी  मिसाइल – हैमर मिसाइल

यह एक शोर्ट रेंज मिसाइल है. इसे बम भी कहा जा सकता है. इसकी रेंज 70 किलोमीटर है, अगर कोई दुश्मन पास है, तो उसे इस मिसाइल के जरिये तबाह किया जा सकता है. इसका निशाना बहुत हि सटीक और अचूंक होता है. मजबूत से मजबूत बंकर, पुल और शक्तिकेंद्र इसके द्वारा ध्वस्त किए जा सकते है.  

चौथी मिसाइल – स्टॉर्म शैड्डो क्रूज मिसाइल

यह एक क्रूज मिसाइल है इसकी रेंज 550 किलोमीटर है. भारतीय सीमा में रहकर इसे लॉन्च किया जाए तो ये पूरा पकिस्तान कवर करता है. अब इसके जरिए चीन भी 550 किल्लोमीटर सीमा के दायरे में टारगेट  पर रहेगा.

राफेल में लगाए जा सकने वाले और हथियार

राफेल को ब्रह्मोस मिसाइल और अस्त्र मिसाइल से भी लैस किया जा सकता है. ब्रह्मोस और अस्त्र दोनों मिसाइल स्वदेशी निर्मित है. ब्रह्मोस कम दूरी की सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल है. ब्रह्मोस भारत और रूस द्वारा विकसित की गई है. यह 10 मीटर तक की ऊँचाई भर सकती है और रडार में भी नहीं आती है. थल सेना, वायु सेना और जल सेना तीनो द्वारा इसका इस्तेमाल किया जा सकता है. इसकी रेंज 290 किल्लोमीटर है. अस्त्र मिसाइल हवा से हवा में वार करने में सक्षम है. यह 110 से 160 किल्लोमीटर की रेंज कवर करती है. यह पूरी तरह से स्वदेश निर्मित मिसाइल है जो की DRDO द्वारा विकसित की गई है.

राफ़ेल का हि चुनाव क्यों ?

राफ़ेल का चुनाव

भारत की भूगोलिक स्तिथी को देखते हुए वायु सेना और केंद्र सरकार द्वारा कई लड़ाकू विमानों के बारे में चर्चा और तुलना करने के बाद एक मत से राफेल का चुनाव किया गया. देश में ऐसे कई ईलाके है जहां का तापमान या तो बहुत हि ठंडा है या बहुत हि गरम हैं, बहुत से छोटे बड़े पहाड़ी ईलाके हैं और ऊँची पर्वत श्रिंक्लाये हैं जहाँ विमानों का पहुँच पाना कठिन होता हैं. किसी भी तरह की सैन्य कारवाई समय रहते कर पाना बहुर मुश्किल होता था, लेकिन अब भारत के पास उसका लड़ाकू विमान राफ़ेल आ चूका हैं. अब दुश्मन देश को किसी भी तरह की सैन्य कारवाई करने से पहले 100 बार सोचना पड़ेगा क्यूंकि अब उन्हें हर कारवाई में मुंह की खानी पड़ेगी.

राफेल का छोटा आकार उसे छोटे बड़े पहाड़ी इलाके में आसानी से उड़ने और कारवाई करने के सक्षम बनाता है. इसके छोटे विंड्सपैन इसे ये क्षमता देते हैं. सुखोई से छोटा होने के कारण इसका इस्तेमाल करना भी आसन हैं. यह विमान पहाड़ी इलाको में जरूरत अनुसार 180 डिग्री तक, घुमने की ताकत रखता हैं. विमान की तेज गति, इसका रडार सिस्टम, इसमें लगी मिसाइले हथियार, इसका इंजन इसका स्पेक्ट्रा वार फेयर सिस्टम इसका डिकोय सिस्टम और  इसका हेलमेट माउंटेड सिस्टम इसे बाकी विमानों से बहुत ताकतवर बनाता हैं जो की भारतीय वायु सेना के लिए बहुत हि जरुरी हैं. राफ़ेल को अपने लड़ाकू विमानों के बेड़े में खड़ा कर भारत आज बहुत हि गौर्वानित और ताकतवर महसूस कर रहा है.

राफ़ेल की तैनाती

राफ़ेल के लिए भारत सरकार के साथ फ्रांस की डील 36 विमानों को लेकर हुई थी जिसमे से 5 लड़ाकू विमानो की पहली खेप 29 जुलाई 2020 को अम्बाला पहुँची. फ्रांस से करीबन 7000 किलोमीटर तक का ये सफ़र तय करके यह भारत के अम्बाला एयर बेस पहुंचे. यह एयर फ़ोर्स के 17 वे स्कवाड्रन का हिस्सा बनेगे जिसका नाम है गोल्डन एरोस. 36 में से 18 विमानों को अम्बाला एयर बेस पर तैनात किया जायेगा और बाकि 18 विमान असम के हासिंमारा एयर बेस पे तैनात किए जायेगे. इन दोनों एयर बेस से चीन और पाकिस्तान दोनों भारत के रडार पे रहेंगे और इन तक पहुँच पाना असान होगा ताकि समय रहते चीन और पाकिस्तान की किसी भी तरह की गुस्ताखी पर सैन्य कारवाई की जा सकें.

राफ़ेल का स्वागत सुखोई और धारा 144 के साथ

राफ़ेल के भारतीय सीमा में प्रवेश करते हि दो सुखोई SU30 MKI लड़ाकू विमानो ने आसमान में राफ़ेल का स्वागत किया और उन्हें स्कोर्ड करते हुए अम्बाला एयर बेस तक लाया गया. विमानों के स्वागत के लिए एयर चीफ मार्शल आरकेएस भदौरिया अम्बाला एयर बेस पर पहुँचे | एयर चीफ मार्शल द्वारा विमान के पायलट्स का उत्साह बढ़ाया गया| हिन्द महासागर में पहुँचते हि कोलकत्ता INS ने राफ़ेल का स्वागत किया. राफ़ेल के अम्बाला पहुँचने से एक दिन पहले शहर में धारा 144 लागु की गई थी ताकि राफ़ेल को सुरक्षापूर्वक लैंड कराया जा सके. मीडिया को राफ़ेल स्वागत में शामिल होने की इजाजत नहीं दी गई थी. बताया जा रहा है की जल्द ही राफ़ेल को वायु सेना के बेड़े में पूर्ण रूप से शामिल किया जाएगा और इसमें मीडिया को भी शामिल किया जाएगा.

निष्कर्ष : भारतीय वायु सेना में राफ़ेल को शामिल किया जा चूका है, जिसने भारतीय वायु सेना की ताकत को बहुत बढ़ा दिया है. अब भारत के लड़ाकू विमानों की पहुँच पूरे पाकिस्तान और चीन के कई शहरो तक जा पहुँची हैं. किसी भी तरह की चुनौती का सामना करने में आज भारत सक्षम है.

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