स्टैचू ऑफ़ यूनिटी

दुनिया की सबसे ऊँची मूर्ति स्टैचू ऑफ़ यूनिटी

आज हमारा देश विकाशील देशो की सूची में से निकल कर विकसित देशो की सूची की तरफ तेजी से बढ़ रहा हैं. जिसमे नयी -नयी तकनीके नए अविष्कार और कुछ ऐसे प्रगतिवान काम किये जा रहे है जिससे भारत देश का नाम विक्सित देशो के साथ जुड़ सके. ऐसे ही भारत ने 2018 में एक विश्व रिकॉर्ड बनाया है जिसमे 182 मीटर ऊँची प्रतिमा का निर्माण किया गया हैं. ये मूर्ति भारत के प्रथम उप प्रधानमंत्री और प्रथम गृहमंत्री को समर्पित की गयी है जिनका नाम है सरदार वल्लव भाई पटेल. सरदार पटेल की इस मूर्ति को स्टैचू ऑफ़ यूनिटी के नाम से जाना जाता है.

दुनिया की सबसे ऊँची मूर्ति

भारत में दुनिया की सबसे ऊँची मूर्ति स्टैचू ऑफ़ यूनिटी का निर्माण 2018 में किया गया, जिसकी ऊंचाई 182 मीटर है. भारत के पूर्व नेता और पहले प्रधानमंत्री सरदार वल्लब भाई पटेल को श्रधांजलि के रूप में ये मूर्ति समर्पित की गई हैं.

अब तक दुनिया की ऊँची मूर्तियो में सबसे ऊँची मूर्ति का ख़िताब चाइना के स्प्रिंग टेम्पल बुद्धा के पास था. जो 128 मीटर ऊँची है, जिसका निर्माण 2008 में पूरा हुआ था. उससे पहले जापान का उशिकू दैबुत्सु स्टेचू  था, जिसकी उचाई 120 मीटर थी और ये 1993 में बन के तैयार हुआ था.

अमेरिका की सबसे ऊँची मूर्ति स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी जिसकी ऊँचाई 86 मीटर है. अब तक इन मूर्तियों का सबसे ऊँची मूर्तियों में रिकॉर्ड था, लेकिन 2018  में भारत ने विश्व की सबसे उची मूर्ति – स्प्रिंग टेम्पल बुद्धा (चाइना) का रिकॉर्ड तोड़ दिया और स्टैचू ऑफ़ युनीटी का निर्माण किया.

सरदार वल्लव भाई पटेल ( एकता के प्रतिक )

सरदार वल्लभ भाई पटेल एकता के प्रतीक

सरदार वल्लव भाई पटेल को विश्व की सबसे ऊँची मूर्ति प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के द्वारा एक श्रधांजलि के रूप में समर्पित की गयी. पटेल को हम सभी लोह पुरुष के नाम से जानते है उन्होंने आधुनिक भारत का निर्माण करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया था. सरदार वल्लव भाई पटेल का जन्म 31 अक्टूबर 1875 को गुजरात के खेडा जिले  के नादियार नामक कस्बे में हुआ था.

अंग्रेजो के शासन के समय में उन्होंने अपना पहला जन आन्दोलन प्रारंभ  किया. उन्होंने किसानो को एकत्रित कर उनका  नेत्तव किया और करो की मांग को कम करने की ब्रिटश सरकार से मांग की, जिसमे उन्हें सफलता मिली. ऐसे ही उन्होंने बरदोली अन्दोलन का संचालन किया वहा भी उन्होंने किसान को लगान से मुक्त  करवाया. लगातार दो आन्दोलन की सफलता के बाद गाँधी जी ने उन्हें सरदार की उपाधि दी | 1920 में गुजरात में उन्हें कांग्रेस के अध्यक्ष के रूप में चुना गया. लगातार तीन बार 1922,1924,1927 में उनका इस पद के लिए चुनाव किया गया. 1945 तक उन्होंने अपने कार्य को सुशोभित किया.

सरदार वल्लभ भाई पटेल एक लोह पुरुष

देश की आज़ादी, एकता और अखंड भारत के लिए उन्होंने एक बड़ा कदम उठाया. 565 रियासतों को सरदार पटेल ने एक किया जो की उस समय में एक नामुमकिन कार्य था, और उन्हें अखंड भारत में शामिल किया.

हैदराबाद का  निज़ाम भारत में शामिल नही होना चाहता था. 13 सितम्बर 1948 को हेदराबाद में एक सैन्य कार्वाही की गयी, जिसका नाम था ऑपरेशन पोलो. इस ऑपरेशन की खास बात यह थी की इसे पूरा करने के लिए किसी भी व्यक्ति का, एक बूंद रक्त भी नही बहा था. इसी के कारण सरदार वल्लभ भाई पटेल को Iron Man यानि लोह पुरुष की उपाधी दी गई. 1991 में उन्हें भारत रत्न से भी सम्मानित किया गया था. भारत वर्ष मे उनके जन्म दिवस 31 अक्टूबर को राष्ट्रिय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है.

स्टैचू ऑफ़ यूनिटी ही नाम क्यों?

सरदार वल्लभ भाई पटेल भारत की एकता और अखंडता का प्रतिक है. जब भारत आजाद हुआ, तब उन्होंने 565 रियासतों को एक किया था और एक राष्ट का निर्माण किया, इसलिए उन्हें एकता का प्रतिक माना जाता है और उनको समर्पित की गई मूर्ति को स्टैचू ऑफ़ यूनिटी के नाम से जाना जाता हैं.

वल्लभ भाई पटेल की इस भव्य मूर्ति का निर्माण करने के लिए भारत के 5 लाख किसानो ने अपने पुराने औज़ारो को दान किया. लगभग 5 हजार टन लोहा एकत्रित किया गया. इसे एकता का प्रतीक माना गया.

इस भव्य मूर्ति निर्माण के भाद स्वराज प्राथना पत्र तैयार किया गया, जहा पर प्रजा को बेहतर शासन के लिए राय देनी थी. लगभग 2 करोड़ लोगो ने इस स्वराज प्राथना पत्र पर हस्ताक्षर किए. ये भी भारतीय एकता को दर्शाता हैं और पहली बार ऐसा हुआ की इतनी बड़ी संख्या में लोग एक साथ आए.

15 दिसम्बर 2013 को पुरे भारतवर्ष में रन फॉर यूनिटी के नाम से एक मैरथन शुरू की गयी और इस मैरथन में पुरे भारत वर्ष में पहली बार बड़ी संख्या में लोगो ने हिस्सा लिया था.  

एक भव्य मूर्ति का निर्माण कार्य   

स्टेचू ऑफ यूनिटी का निर्माण कार्य

भारत में विश्व रिकॉर्ड कायम करने वाली मूर्ति का निर्माण कार्य 2013 में शुरू किया गया. इस कार्य की शुरुआत की घोषणा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 2013 में ही की थी, जब वो गुजरात के मुखिय्मंत्री थे.

गुजरात में नर्मदा नदी के ऊपर बाँधा सबसे बड़ा सरदार सरोवर बांध से 3.2 किलोमीटर दूर एक छोटे से टापू, जिसे साधू वेट कहा जाता है, पर दुनिया की सबसे उची प्रतिमा का निर्माण किया गया है. इसकी ऊँचाई आधार समेंत नापी जाये तो 240 मीटर  होती है. जिसमे 58 मीटर का आधार के ऊपर 3  मंजिला ईमारत है और उसके ऊपर 182 मीटर ऊँची प्रतिमा. 182 मीटर की प्रतिमा इसलिए सुनश्चित की गई हैं क्योंकी गुजरात विधान सभा में 182 सीट उपलब्ध है और गुजरात  में 182 निर्वाचित क्षेत्र है.

स्ट्रक्चर लगभग 20,000 स्क्वायर मीटर में फैला है और इसे 12 किलोमीटर लम्बे तालाब से घेरा हुआ है. स्टैचू ऑफ़ यूनिटी को पदम् भूषण से सम्मानित शिल्पकार राम वि सुतार ने डिजाईन किया है. ये मूर्ति स्टैचू ऑफ़ लिबर्टी से दो गुना ऊँची है. इस प्रतिमा में 1700 टन ताम्बे का इस्तेमाल किया गया है. यह मूर्ति 5 साल के प्रथक प्रयासों से बनी है. इसमें 70,000 मीट्रिक टन सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है. इसके अलावा 24,500 मीट्रिक टन स्टील सरदार वल्लव भाई पटेल की इस प्रतिमा को बनाने में लगाया गया है.

लगभग 2500  मजदूरो ने इस प्रतिमा का निर्माण किया और 250  इंजिनियरो की मेहनत इस प्रतिमा को बनाने में लगी है. स्टेचू ऑफ़ यूनिटी 180 किमी. प्रति घंटा  की रफ़्तार से हवा के दबाव को और 6.5 तीव्रता के भूकंप को झेल सकती है और वाकई में ये एक लोखंडी प्रतिमा है.

स्टैचू ऑफ़ यूनिटी का बजट

135 करोड़ जनता के संघर्ष से बनी दुनिया की सबसे उची मूर्ति जो की एकता का प्रतीक है. इस मूर्ति के निर्माण में लगभग 3000 करोड़ का खर्च हुआ है. इसका निर्माण करने वाली कंपनी एल एंड टुब्रो ने खुद यह स्वीकार किया. एल एंड टी कंपनी का साथ दिया तुर्नल कंस्ट्रक्शन ने, जो दुबई में प्रसिद्ध सबसे ऊँची मूर्ति बुर्ज़ खलीफा को बनाने के लिए विख्यात है. साथ ही साथ इसमें भारत और चाइना के मजदूरो ने मिलकर, इस कार्य में अपना श्रम योगदान दिया है. 31 अक्टूबर 2013 को मूर्ति का निर्माण कार्य शुरू हुआ था और मध्य अक्टूबर 2018 को कार्य समाप्त हुआ. इसके बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने 31 अक्टूबर  2018 को सरदार वल्लभ भाई पटेल के जन्म दिवस पर मूर्ति का उद्घाटन किया.

स्टैचू ऑफ़ यूनिटी एक पर्यटक स्थल

स्टेचू ऑफ़ यूनिटी एक पर्यटक स्थल

भारतीय जनता और प्रधान मंत्री मोदी जी के सांझे प्रयासों द्वारा बनी विश्व की सबसे ऊँची प्रतिमा को देखने के लिए पहले ही दिन शनिवार को 30 हजार लोगो की भीड़ इकटठा हुई. यकीन करना मुश्किल था क्योंकि ये मूर्ति एक छोटे से गाँव के पास बनायी गयी है. इस मूर्ति के निर्माण से कई लोगो को रोजगार की सुविधा मिली. अब यहाँ लाखो की संख्या में पर्यटक मूर्ति को देखने आते है और भव्य मूर्ति को देखकर आश्चर्यचकित होते हैं. इस मूर्ति का आधार 58 मीटर ऊँचा और 3 मंजिला है और इसमें मेमोरियल गार्डन, मियुज़िम और सरदार वल्लभ भाई पटेल के जीवन से सम्बंधित वस्तुएं रखी गयी है.

प्रतिमा में लिफ्ट की सुविधा भी दी गई है जिसके जरिए प्रतिमा के हृदय स्थल पर पहुँचा जा सकता है. इस लोकेशन पर एक श्रेष्ठ भारत भवन है, जहा पर 3 स्टार होटल्स टेंट की सुविधाए मौजूद है. स्टैचू ऑफ़ यूनिटी के पास एक पब्लिक प्लाजा भी है जहा पर पर्यटको के लिए खाने पीने की सुविधा का इंतजाम किया गया है. उसके बाद गिफ्ट आर्टिकल्स और छोटी छोटी मूर्तियों की दुकानो की सुविधाए उपलब्ध कराई गयी है. स्टैचू ऑफ़ यूनिटी साईट पर जाने का समय सुबह 8 बजे से लेकर शाम 6  बजे तक रखां गया हैं. सोमवार को साईट बंद रहती है.

साईट पर आने जाने का टिकेट लगभग 350 रुपये है. इस मूर्ति में दो लिफ्ट भी लगायी गयी है जिसके माध्यम से पर्यटक सरदार पटेल की छाती पर पहुच कर वहा  से सरदार सरोवर बांध का नज़ारा देख सकते है. सरदार वल्लभ भाई पटेल की मूर्ति तक पहुचने के लिए पर्यटकों के लिए कई सुविधाए दी गयी है. उनके लिए वोट और पुल की व्यवस्था भी की गयी है.

निष्कर्ष :

दुनियाँ की सबसे ऊँची प्रतिमा स्टैचू ऑफ़ यूनिटी सरदार वल्लव भाई पटेल को पूरे भारतवासियो की तरफ से श्रधांजलि के रूप में अर्पित की गई है. सरदार वल्लव भाई पटेल ने आधुनीक भारत का निर्माण किया था. कई ऐसे कार्य किए जिसके कारण हम उन्हें आज भी याद करते है. सरदार पटेल ने हम भारतवासीयों को एकता का पाठ पढाया हैं. यह शिक्षा दी और यह विश्वास दिलाया हैं की, भारत की अखंडता ही भारत की सबसे बड़ी ताकत हैं.

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